Saraswati Puja – मॉं सरस्वती की सरल पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, प्रसाद और दान
Vasant Panchami Saraswati Puja
Saraswati Puja 2026 in Hindi
सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन क्यों की जाती है?
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ज्ञान की देवी मां सरस्वती जी ब्रह्माजी के मुख से प्रकट हुई थीं। इसलिए बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है। सरस्वती मां को ज्ञान और विद्या की देवी कहा जाता है। इसलिए इस दिन पूरे विधि विधान से मां सरस्वती की पूजा करने से वो प्रसन्न होती हैं और भक्तों को विद्या प्रदान करने के साथ उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। बसंत पंंचमी वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। यहां हम आपको पूजा की विधि, पूजा में लगने वाली सामग्री, पूजा मंत्र, पूजा का मुहूर्त, दान देने वाली वस्तुएं आदि के बारे में बता रहे हैं।
सरस्वती पूजा विधि सामग्री
- पीला वस्त्र
- मूर्ति अथवा चित्र
- नवग्रह चित्र
- दीपक
- अगरबत्ती
- श्रृंगार सामग्री
- कपूर
- रोली मौली
- केसर
- हल्दी
- चावल
- पीले फूल
- पीली मिठाई
- मिश्री
- दही
- हलवा
- श्वेत चंदन
- पीले और सफेद फूल
सरस्वती पूजन मंत्र
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।
वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।
मॉं सरस्वती की सरल पूजा विधि
- मां सरस्वती की पूजा करने से पहले नहा-धोकर सबसे पहले पीले वस्त्र धारण कर लें।
- जिस स्थान पर पूजा करनी है, वहॉं साफ करके आटे से छोटी सी रंगोली/ चौक बनाए।
- उसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाएं।
- रंगोली/ चौक के ऊपर पाटला रखकर उस पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती जी की मूर्ति को उस पर स्थापित करें।
- देवी की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करने के बाद सबसे पहले कलश की पूजा करें।
- फिर दीपक और अगरबत्ती जलाऍं।
- इसके उपरांत नवग्रहों की पूजा करें और फिर मां सरस्वती की उपासना करें।
- इसके बाद पूजा के दौरान उन्हें विधिवत आचमन और स्नान कराएं। फिर देवी को श्रंगार की वस्तुएं चढ़ाएं।
- मां सरस्वती के पैरों में श्वेत चंदन लगाएं।
- जिसके बाद रोली मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि का प्रसाद मां के सामने अर्पित कर ध्यान में बैठ जाएं।
- पीले और सफेद फूल दाएं हाथ से उनके चरणों में अर्पित करें और ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप करें।
- शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजन करके उससे छुटकारा पाया जा सकता है।
बसंत पंचमी का सरस्वती पूजा मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत पंचमी का त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में यह तिथि जनवरी के महीने में पड़ रही है। पंचांग की गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष यह पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त का विवरण:
पंचमी तिथि का आरंभ: 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 बजे से।
पंचमी तिथि का समापन: 24 जनवरी 2026 को रात 01:46 बजे तक।
सरस्वती पूजा का सबसे शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। चाहे वह विवाह हो, गृह प्रवेश हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना, यह दिन हर प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी है।
मॉं सरस्वती पूजा / वसंत पंचमी के दिन क्या दान करना चाहिए?
बसंत पंचमी के दिन विभिन्न स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा होती है। ऐसी जगहों पर जा कर कलम, दवात, पेन, पेंसिल, कॉपी किताब जैसी पढ़ाई से संबंधित वस्तुओं का दान करना अच्छा माना जाता है।
मॉं सरस्वती पूजा के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
प्र.1 मां सरस्वती को क्या प्रसाद चढ़ाया जाता है?
उ. बसंत पंचमी के दिन शाही केसरिया भात (पीले रंग के मीठे चावल) का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं। इसके अलावा चने की दाल का हलवा, सूजी का पीले रंग का हलवा या फिर कोई मीठी चीज जो पीले रंग की हो जैसे बेसन या बूंदी के लड्डू आदि भी मां को भोग लगा सकते हैं।
प्र.2 सरस्वती माता को क्या चढ़ाएं?
उ. मॉंं सरस्वती जी काे पीला रंग अच्छा लगता है। आप मां सरस्वती को पीले चंदन और केसर का तिलक लगाएं। पीले या फिर सफेद रंग के फूलों को मां पर अर्पित किया जाता है, पीले रंग की साज-सज्जा की जाती है और पीले रंग के चावल माता को भोग लगाया जाता हैं। माना जाता है कि मां सरस्वती को पीले चावल बेहद अच्छे लगते हैं। आप पीली बूंदी का भोग भी लगा सकते है।
प्र.3 बुद्धि की देवी कौन है?
उ.सरस्वती जी को विद्या, संगीत और बुद्धि की देवी भी कहा गया है।
प्र.4 विद्या प्राप्ति के लिए कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
उ. सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः।
वेद वेदांत वेदांग विद्यास्तानेत्र्य एव च।
सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने,
विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।
प्र.5 सरस्वती जी का दूसरा नाम क्या है?
उ. सरस्वती देवी को अन्य नाम जैसे शारदा, वीणावादिनी, वीणापाणि, भारती, हंसवाहिनी आदि कई नामों से जाना जाता है।
प्र.6 देवी सरस्वती जी के पति कौन है?
उ. देवी सरस्वती जी के पति भगवान ब्रह्मा जी है।
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